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मंगलवार, फरवरी 9, 2010, समय: 9:40
Updated 06:53Hrs 09-02-2010
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डीडीए को अभी क्लीन चिट नहीं
संजय टुटेजा/एसएनबी
नई दिल्ली। डीडीए आवासीय योजना के आवंटन में आर्थिक अपराध शाखा से डीडीए को क्लीनचिट मिल जाने के बावजूद फ्लैटों के आवंटन में अभी कई पेच हैं। इस संबंध में केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा कराई गई आंतरिक जांच की रिपोर्ट को डीडीए दबाए हुए है और अदालत से भी डीडीए को अभी क्लीनचिट नहीं मिली है। इस मामले में अदालत की शरण लेने वाले आवेदक भी अब एक बार फिर डीडीए की घेरेबंदी करने में जुट गए हैं। ऐसे में डीडीए नवम्बर माह से आवंटियों को आवंटन पत्र जारी कर सकेगा इसमें संदेह दिखाई दे रहा है।
डीडीए ने आवासीय योजना-2008 घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा से क्लीनचिट मिलने का दावा करते हुए नवम्बर से आवंटियों को आवंटन पत्र जारी करने की घोषणा की है लेकिन जिस तरह दिल्ली हाईकोर्ट में यह मामला विचाराधीन है उसे देखते हुए अदालत की अनुमति के बिना डीडीए के लिए सफल आवेदकों को आवंटन पत्र जारी करना मुश्किल हो सकता है। घोटाले के बाद इस योजना के एक आवेदक सलेक चंद जैन ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर हाईकोर्ट ने डीडीए को नोटिस देकर इस मामले में की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा मांगने के साथ-साथ केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा कराई गई आंतरिक जांच की रिपोर्ट भी मांगी थी। इस नोटिस के जवाब में डीडीए ने एक शपथपत्र के जरिए अदालत को बताया था कि मामले की जांच हो रही है और पूरी तरह क्लीनचिट मिलने के बाद ही फ्लैटों का आवंटन किया जाएगा।
इस मामले में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुग्रीव दुबे का कहना है कि डीडीए भले ही क्लीनचिट मिलने का दावा करे लेकिन न तो डीडीए के दावे में दम है और न ही आर्थिक अपराध शाखा की रिपोर्ट को सही माना जा सकता है। अदालत ने अभी डीडीए को क्लीनचिट नहीं दी है। उन्होंने कहा कि पुलिस की भूमिका ठीक नहीं है और वह इस मामले से अदालत को भी अवगत कराएंगे। उन्होंने कहा कि जब यह मामला अदालत में विचाराधीन है तो फिर अदालत के आदेश के बिना डीडीए फ्लैटों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू नहीं कर सकता। यदि ऐसा किया गया तो यह अदालत की अवमानना होगी। इस मामले में हुई आंतरिक जांच की रिपोर्ट फरवरी माह में ही डीडीए को मिल गई थी, जिसकी एक एक प्रति उपराज्यपाल व सचिव केन्द्रीय शहरी विकास विभाग को भी भेजी गई थी। इस रिपोर्ट को हासिल करने के लिए एक आवेदक एमके गुप्ता ने एक आरटीआई उपराज्यपाल व सचिव शहरी विकास विभाग के यहां डाली थी, जिसके जवाब में उन्हें कहा गया था कि उनकी आरटीआई को जवाब के लिए डीडीए को भेजा गया है। इस संबंध में गुप्ता ने जब डीडीए में अपील की तो जवाब में बताया गया कि उनकी आरटीआई को जवाब के लिए निदेशक विजिलेंस के पास भेजा गया है लेकिन आज तक उन्हें वह रिपोर्ट नहीं दी गई है। गुप्ता ने अब केन्द्रीय सूचना आयोग में इस मामले की अपील की है। उधर डीडीए प्रवक्ता नीमोधर का कहना है कि कानूनी राय लेने के बाद ही डीडीए ने नवम्बर से आवंटन प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है।
Updated :
Wednesday, 04 Nov 2009, 12:27 [IST]
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