अजय तिवारी/सहारा न्यूज ब्यूरो

नई दिल्ली। क्या भारत में यह अधिकार महिलाओं के पास है कि वह कितने बच्चे पैदा करे ? अटपटा सा लगने वाला यह सवाल माकपा की नेता वृंदा करात ने उठाया है। उनका कहना है महिला कितने बच्चे पैदा करे यह फैसला पुरूष यानी पति करता है। शहरी महिलाओं में किसी वर्ग को मिले इस तरह के अधिकार को अपवाद ही कहा जा सकता है।

यह सवाल सीधे तौर पर मातृ मत्यु दर से जुड़ा हुआ है जिसके मामले में भारत का रिकार्ड बेहद खराब है। आर्थिक समृद्धि में लगातार आगे बढ़ रहे देश के लिए यह शर्मिंदा करने वाली स्थिति है कि यहां लगभग एक लाख महिलाओं की मौत प्रसव के दौरान उपचार नहीं मिलने की वजह से हो जा रही है।

मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए वृंदा करात ने बहुत ही गंभीर प्रश्न स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदास के सामने रखा है। उनका आग्रह है कि जननी सुरक्षा योजना के तहत अधिकतम 1400 रूपए की जो मदद मिलती है उसे दो बच्चों से ज्यादा बच्चों के जन्म पर भी दिया जाए। इसके पीछे उनका तर्क यह है कि कौन महिला कितने बच्चे पैदा करे यह उसके हाथ में नहीं है। और जब सामाजिक कारणों से ऐसा करना उसके लिए संभव नहीं है तो क्यों सरकार उसे खुराक और उपचार के लिए मिल सकने वाली रकम से वंचित कर रही है।

उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार आ॓ैर मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य भले ही मातृ मृत्य दर घटने के आंकड़े पेश कर रहे हों लेकिन स्थिति को संतोषजनक नहीं कहा जा सकता। इन राज्यों में अभी भी प्रति एक लाख बच्चों के जन्म के समय 350-515 महिलाओं की मृत्यु हो जाती है। इस आंकड़े का देशव्यापी परिदृश्य भी तकरीबन समान है जहां 300-400 महिलाएं प्रसव के समय दम तोड़ देती हैं। भारत, चीन तो क्या श्रीलंका और थाईलैंड के आगे भी कहीं नहीं ठहरता जहां लाख जन्म पर बमुश्किल 60 महिलाएं दम तोड़ती हैं। इस स्थिति तक पहुंचने के लिए भी बड़े प्रयास करने की जरूरत है। अभी साल 2010 में यह आंकड़ा 300 से घटाकर 100 लाने का लक्ष्य रखा है। प्रसव से पहले स्वास्थय संबंधी परामर्श, अस्पताल में प्रसव और जरूरी दवाएं इत्यादि से एक बड़ा तबका महरूम है। अस्पतालों में प्रसव के लिए राज्यों में अभियान चलाए जा रहे है और जननी सुरक्षा योजना के तहत आर्थिक मदद भी दी जा रही है लेकिन नतीजे बहुत उत्साह जनक नहीं है। जननी सुरक्षा योजना में 25624 लाख रूपए विभिन्न राज्य खर्च कर ुचुके हैं। सबसे ज्यादा 4866 लाख रूपए मध्य प्रदेश ने, 1917 लाख रूपए उत्तर प्रदेश ने और 442 लाख रूपए बिहार ने खर्च किए हैैं। प्रसव के पहले और बाद में होने वाले संक्रमण और खून की कमी की वजह से बड़ी तादाद में महिलाएं दम तोड़ रही हैं।

अनिल वर्मा