समस्याएं उपभोक्ताओं की

अनिल कर्णवाल (एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट)

जिला उपभोक्ता फोरम के निर्णय के विरूद्ध मैंने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की थी। राज्य आयोग के समक्ष मैंने 9 दिनों के विलम्ब को माफ किये जाने की याचिका भी दायर की थी। अपील दायर करने में 9 दिनों का विलम्ब मेरे सड़क दुर्घटना के कारण हुआ था। लेकिन राज्य आयोग ने विलम्ब के आधार पर ही मेरी अपील खारिज कर दी। कृपया बतायें मैं क्या करूं?

विभूति राय

महाराजगंज(उप्र)

सुप्रीम कोर्ट ने जी. रामे गोड़ा बनाम विशेष भू-अर्जन अधिकारी ज्ञठध 1988 सुप्रीम कोर्ट 897 नामक केस में कहा है कि विलम्ब माफ किये जाने की याचिकाओं का निस्तारण उदारता के साथ किया जाना चाहिए। उक्त निर्णय के आधार पर राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के समक्ष निगरानी याचिका दायर कर सकते हैं।

मैंने सिवानी ऑटोमोबाइल लिमिटेड नामक कम्पनी की कार ‘मोंटाना’ की बुकिंग हेतु 10,000 रूपया सन् 1990 में जमा कराया था। बाद में पता चला कि यह कम्पनी ही फेल हो गयी है। मेरी बुकिंग राशि आज तक नहीं मिली है। कृपया बतायें क्या किया जाये?

मुकेश वर्मा

खतौली, मुजफ्फरनगर(उप्र)

आपको अपने क्लेम हेतु याचिका पहले ही दायर कर देनी चाहिए थी। आज बुकिंग को 18 वर्ष हो चुके हैं। वैसे हमारी जानकारी के अनुसार सिवानी ऑटोमोबाइल लिमिटेड के विरूद्ध बंगलौर उच्च न्यायालय के समक्ष केस लम्बित था। आप बंगलौर उच्च न्यायालय अथवा उसके ऑफीशियल लिक्डिेटर के समक्ष अपना क्लेम दायर कर सकते हैं।

हमारे क्षेत्र की पुलिस हमें आये दिन बेवजह प्रताड़ित करती रहती है। मैंने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग से भी गुहार लगायी थी। लेकिन आयोग ने भी कोई कार्यवाही नहीं की। कृपया बतायें मैं क्या करूं?

मुश्ताक अहमद

बस्ती(उप्र)

यदि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने भी आपके मामले में कुछ नहीं किया है, तो आप इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष रिट याचिका दायर कर सकते हैं तथा दोषी पुलिस कर्मियों के विरूद्ध समुचित कानूनी कार्यवाही की मांग की सकते हैं।

17,000 रूपयों के एक चेक के संबंध में मैंने बैंक को लिखित अनुरोध कर उक्त चेक का भुगतान रूकवा दिया था। लेकिन मेरे निर्देश के बावजूद बैंक ने उस चेक को पास कर भुगतान कर दिया। कृपया बतायें क्या मैं बैंक से नुकसान की भरपाई कर सकता हूं?

किशन लाल

गाजियाबाद(उप्र)

आप बैंक से निश्चित रूप से अपने नुकसान की भरपाई प्राप्त कर सकते हैं, क्योंकि ‘खसहै ढमवलनूस’ के बावजूद भी यदि बैंक चेक को पास करता है, तो यह ‘सेवा में कमी’ का मामला बनता है। आप बैंक के विरूद्ध उपभोक्ता अदालत में केस दायर करें।

मैंने एक मासिक पत्रिका का 3 वर्ष का अग्रिम भुगतान कर डाक से उसे प्राप्त करने का अनुबंध किया था। तथा इसके लिए रू. 50 रूपये का भुगतान भी कर दिया। समस्या यह है कि यह पत्रिका मुश्किल में 3-4 माह ही प्राप्त होती है। गायब हुए अंकों की प्रति भी पत्रिका का प्रकाशक मेरे लिखित अनुरोध के बाद भी नहीं भेजा है। कृपया बतायें क्या किया जाये?

अशोक खण्डेलवाल

गोरखपुर(उप्र)

पत्रिका का प्रकाशक निश्चित रूप से ‘सेवा में कमी’ का जिम्मेदार है। आप पत्रिका के विरूद्ध जिला उपभोक्ता फोरम में केस दायर करें तथा समुचित मुआवजे की मांग करें।

मेरी पत्नी ने भारतीय जीवन बीमा निगम से 1,00,000 रूपयों की पॉलिसी ली हुई थी। दुर्भाग्यवश प्रसव के दौरान उसकी मृत्यु हो गयी। समस्या यह है कि बीमा कम्पनी क्लेम देने से इनकार कर रही है। कृपया बतायें क्या किया जाये?

महावीर प्रसाद

पिलखुवा, गाजियाबाद

आपने पत्र में यह नहीं लिखा है कि बीमा निगम किस आधार पर क्लेम देने से इनकार कर रहा है। बहरहाल, आपके लिए बेहतर यही होगा कि आप बीमा निगम के विरूद्ध जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष याचिका दायर करें।

हम लोग लगभग 4 बीघे जमीन लगभग पिछले 24 वर्षों से जोत रहे हैं तथा उस पर काबिज हैं। लेकिन सरकार हमें ‘भूमिधर’ का अधिकार नहीं दे रही है। कृपया बतायें मैं क्या करूं?

गोपीराम

अमरोहा, ज्योतिबा फूलेनगर(उप्र)

आप उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भू सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 229बी के अंतर्गत याचिका कर अपने आपको ‘भूमिघर’ घोषित किये जाने की मांग करें।

कृपया बतायें कि चेक बाउन्स होने का नोटिस सर्व करने के कितने दिनों के बाद हमें कोर्ट में केस दायर करना आवश्यक है?

जगदीश गोयल

बलवीर नगर, दिल्ली

निगोशियबल इंस्टूमेंट एक्ट, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत आप चेक जारी कर्ता को नोटिस भेजकर 15 दिनों की सीमा के अंतर्गत भुगतान करने का निर्देश देते हैं। यदि चेक जारीकर्ता इन दिनों में भी भुगतान नहीं करता है, तो आप एक माह के भीतर ही केस दायर कर सकते हैं।

प्र. : निशेष जैन, डिजाइनिंग : सुरेन्द्र देशवाल

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